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धर्म

धर्म स्वैच्छिक है: “धर्म में बल प्रयोग नहीं। सुपथ कुपथ से साफ-साफ अलग हो चुका है। [कुरआन २:२५६]

धर्म स्वैच्छिक है:  “धर्म में बल प्रयोग नहीं। सुपथ कुपथ से साफ-साफ अलग हो चुका है।” (कुरआन २:२५६) Ref: Wisdom Media School | #IslamicQuotes by Ummat-e-Nabi.com

धर्म आत्मज्ञान के लिए है। “आस्था, कर्म और संस्कृति का संगम जब होता है तब धर्म प्रबुद्ध होता है। इन में से एक की भी कमी धर्म की आत्मा को नष्ट कर देती है।

आलोक धर्म आत्मज्ञान के लिए है। “आस्था, कर्म और संस्कृति का संगम जब होता है तब धर्म प्रबुद्ध होता है। इन में से एक की भी कमी धर्म की आत्मा को नष्ट कर देती है।” Ref: Wisdom  Media School | #IslamicQuotes by Ummat-e-Nabi.com