शर्म व लज्जा तथा जुबान को वश में रखना ईमान की दो शाखाएं हैं

पैग़म्बर मुहम्मद (ﷺ) ने फरमाया कि:

“शर्म व लज्जा तथा जुबान को वश में रखना ईमान की दो शाखाएं हैं और बेहयाई (निर्लज्जता) की बोली तथा निरर्थक बकवास निफ़ाक़ (पाखण्ड) की दो शाखाएं हैं।”

[तिरमिज़ी]
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