हर सुबह फुसफुसाती है: “हे मनुष्य! मैं एक नया दिन हूँ, तुम्हारे कर्मों का साक्षी। मेरा फायदा उठाओ, चला गया तो मैं वापस नहीं आता।” [हसनुल बसरी]

हर सुबह फुसफुसाती है :  

“हे मनुष्य! मैं एक नया दिन हूँ, तुम्हारे कर्मों का साक्षी। मेरा फायदा उठाओ, चला गया तो मैं वापस नहीं आता।”

(हसनुल बसरी)

Ref: Wisdom Media School | #IslamicQuotes by Ummat-e-Nabi.com

AlokHindi Hadeesआलोकसुबह
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